Saturday, 2 February 2013

दोस्ती में दरार

दोस्ती में दरार

शादी के बाद एक बार सन्ता का दोस्त बन्ता उसके घर उस से मिलने आता है।

सन्ता और उसकी बीवी प्रीतो की खातिरदारी देख कर बन्ता रात को वहीं रुकने का फैसला कर लेता है तो...
सन्ता उसका पलंग बाहर बरामदे में लगा देता है, यह देख बन्ता को बहुत बुरा लगता है तो वह सन्ता से कहता है, " तू खुद अन्दर ए सी में सोयेगा और मुझे यहाँ गर्मी में सुला रहा है? लगता है दोस्ती में दरार आ गई है।

सन्ता- यार, समझा कर, अब मेरी शादी हो गई है।
सन्ता की बात से बन्ता संतुष्ट नहीं होता, तो हार कर सन्ता उसका अपने कमरेमें रखे सोफे पर बन्ता के सोने का बंदोबस्त कर देता है।

आधी रात के करीब बन्ता उठता है और सन्ता से कहता है- यार मुझे सोफे पर नींद नहीं आ रही इसीलिए मैं भी पलंग पर ही सोऊँगा।

सन्ता- यार यह कैसे हो सकता है पलंग पर तो मैं अपनी पत्नी के साथ सो रहा हूँ।

पर फिर भी बन्ता नहीं मानता है और सन्ता से कहता है- दोस्त तू बदल गया है, लगता है दोस्ती में दरार आ गई है।

बन्ता की बात सुन कर सन्ता को थोड़ा बुरा लगता है परंतु वह फिर भी बन्ता अपने साथ अपने पलंग पर अपनी दाईं ओर सुला लेता है और खुद उसके और अपनी पत्नी के बीच में सो जाता है।

कुछ देर बाद बन्ता फिर उठता है और सन्ता से कहता है- मुझे पलंग के किनारे पर नींद नहीं आ रही क्योंकि मुझे डर लग रहा है कि कहीं मैं गिर नाजाऊँ इसीलिए मैं तो बीच में सोऊँगा।

सन्ता- यार ऐसे कैसे हो सकता है दूसरी तरफ मेरी बीवी सो रही है, तू बीच में कैसे सो सकता है?

बन्ता- मैं ना कहता था तू बदल गया है तुझे अब मुझ पर भरोसा ही नहीं रहा, देखा आ गई ना दोस्ती में दरार।

बन्ता की बात सुन कर सन्ता फिर उसकी बात मान लेता है और उसे अपने और अपनी पत्नी के बीच में सुला लेता है।

अगले दिन सुबह जब दोनों दोस्त सो के उठते हैं तो बन्ता सन्ता से कहता है- यार तेरी बीवी तो बड़ी चालू है सारी रात मेरा पकड़ कर सोती रही।

सन्ता- भों*ड़ी के ! वो मेरी बीवी नहीं, मैं था और मुझे ऐसा करना पड़ा।

बन्ता- ऐसा क्यों?

सन्ता- मा*रचो*, अगर मैं ऐसा नहीं करता तो दरार में दोस्ती आ जाती इसीलिए


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