लन्ड स्तुति:
हे लन्ड देव तुमको प्रणाम
शत शत प्रणाम,शत शत प्रणाम
झाटों के सुन्दर झुरमुट से जब सिंह समान निकलते हो
नौ इंच रजाई उठ जाती जब सोते से तुम जगते हो
जब अन्दर बाहर होते हो तब भाले जैसे चुभते हो
जब छोटे बड़े होते हो तब बड़े सुन्दर दिखते हो
हर चूत तुम्हारी दासी है
हर गांड तुम्हारी प्यासी है
हे लन्ड देव तुमको प्रणाम
शत शत प्रणाम,शत शत प्रणाम...






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