एक दिन अकबर बीरबल से कहता है - "बीरबल शहर के किसी अच्छे चित्रकार को बुलवाओ"
बीरबल - "जो हुक्म जहाँपनाह"
चित्रकार को पेश किया जाता है ! अकबर चित्रकार को अकेले में ले जाकर कहता है कि भाई दो पेंटिंग बनानी हैं
"एक मेरे बाप की और एक बीरबल के बाप की "
चित्रकार - "ठीक है जहाँपनाह ! काम हो जायेगा"
"अबे पहले सुन तो ले लंडू चित्रकार कि पेंटिंग बनानी कैसे हैं"- अकबर ने चित्रकार को धमकाया
चित्रकार - "बोलिए हुज़ूर"
मेरे बाप की पेंटिंग में उनका पोज़ हाथ जोड़े हुए होना चाहिए और बीरबल के बाप का पोज़ कुछ इस तरह हो कि एक हाथ में रोटी और एक हाथ में लंड पकडे हों - अकबर ने चित्रकार को समझाया
चित्रकार मन ही मन अकबर की मादरचोदी पे हँसता हुआ चला जाता है यह बोल कर कि 1 महीने में वो पेंटिंग बना देगा
1 महीने बाद चित्रकार पेंटिंग भरे दरबार में ले कर पहुचता है ! अकबर पेंटिंग देखकर गांडू हंसी हंसते हुए बीरबल कि चुटकी लेते हैं:
"बीरबल ये देखो हमारे पिताजी कितने शरीफ और सज्जन आदमी थे कैसे हाथ जोड़े खड़े हैं और तुम्हारे पिताजी कितने हरामी और बेशरम किस्म के इंसान थे देखो कैसे एक हाथ में लंड और एक हाथ में रोटी लिए खड़े हैं"
बीरबल भला कैसे चुप रहे, बीरबल ने बड़े ही शालीनता से जवाब दिया - "गुस्ताखी माफ़ जहाँपनाह ! जहाँ तक पेंटिंग देखकर मेरी समझ में आता है वो ये है कि आपके पिताजी हाथ जोड़कर मेरे पिताजी से रोटी मांग रहे हैं और मेरे पिताजी कह रहे है कि रोटी नहीं दूंगा लंड चाहिए तो लेले"






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