संता कुछ काम-धाम नहीं करता था, जब देखों तक झुके हुए लंड की तरह बिस्तर पर पड़ा रहता। लेकिन वह बड़ा चुदक्कड़ था। उसकी बीवी प्रीतो उसकी लंडूपन से तंग आ चुकी थी। संता प्रीतो की कोई इच्छा पूरी न करता, बस उसे उठा-उठाकर रात-रात भर चोदता रहता।
एक रात संता प्रीतो के साथ सोया था। वह गहरी नींद में था और उसे नींद में लगा कि वह मर गया है। यमदूत आया और उससे बोला: "चल भई तेरा टाइम आ गया है, तूने अपनी ज़िंदगी में कुछ किया-विया तो है नहीं, इसलिए न तो तूने पाप किया है, और न पुण्य, इसलिए यमराज तुझ जैसे निष्क्रिय प्राणी को स्वर्ग में स्थान देना चाहते हैं, चल मेरे साथ"
संता पहले तो यमदूत के साथ नहीं जाना चाहता था, लेकिन जब उसने स्वर्ग का नाम सुना तो उसकी बाँछें खिल गई। उसका लौड़ा गुलाटी मारने लगा कि स्वर्ग में अप्सराएँ मिलेंगी तो उनकी चूत चाटने को मिलेगी। उनकी गाँड़ में दिन भर अपना मुँह लगाए फिरेगा। बस चांदी ही चांदी होगी।
संता का भाव बढ़ गया तो उसने यमदूत से कहा: "सुन बे यमराज की झाँट के बाल, मैं तेरे साथ चलने के लिए तैयार हूँ, मगर रास्ते में जो भी मांगू वह देना, अगर मना किया तो वहीं से वापस चला आऊंगा और यमराज तुझे नौकरी से तो निकालेगा ही साथ ही अपने भैंसे का सींग तेरी गाँड़ में घुसाकर भैंसे से ही तेरी गाँड़ मरवाएगा, बोल मंज़ूर है"
यमदूत की गाँड़ पानी-पानी हो गई, उसने कहा: "नहीं भाई ऐसा गज़ब न करना नहीं तो यमराज बहुत गाँड़फाड़ू देवता होता है, मेरी गाँड़ भूनकर दानवों में बाँट देगा"।
संता शान से उसके साथ चला गया। रास्ते में उन्हें मेनका दिखाई दी। मेनका अाधी नंगी अवस्था में थी और उसके स्तन पपीतों की तरह इधर-उधर हिल रहे थे। संता का लंड बेक़ाबू हो गया तो उसने यमदूत से कहा, "मुझे इसे चोदने दे"। यमदूत पहले तो ना-नुकुर करता रहा, लेकिन उसने संता से वादा जो किया था, उसे तो निभाना ही था। मजबूरन उसने मेनका से मिन्नतें कीं कि वह संता को अपनी चूत का स्वाद चखा दे। संता ने मेनका को खूब चोदा, और उसके बाद वे आगे बढ़ गए।
आगे उन्हें उर्वशी मिली। संता का लंड फिर मिसाइल की तरह खड़ा हो गया, तो उसने यमदूत से फिर कहा, "मुझे इसे चोदने दे"। मरता क्या न करता, यमदूत ने उर्वशी को अपनी नौकरी का वास्ता दे कर उसे संता से चुद जाने के लिए राज़ी कर लिया। संता ने उछल-उछलकर उर्वशी को चोदा और उसके बाद वे आगे बढ़ गए।
संता का लंड फिर से बेचैन होने लगा। बहुत देर चलने के बाद जब उन्हें कोई नहीं मिला तो संता ने यमदूत से कहा, "सुन बे यमराज के चपरासी, मेरा लंड तो फिर से तन गया है, और यहाँ कोई अप्सरा भी नहीं है। ऐसा कर, तू मुझे अपनी गाँड़ मारने दे, फिर हम आगे बढ़ेंगे"। यमदूत के पास कोई चारा नहीं था, उसने अपनी काली-काली गाँड़ संता के सामने पेश कर दी। संता ने यमदूत की गाँड़ मार दी। यमदूत चीखता-चिल्लाता रहा, लेकिन अपनी नौकरी जाने के डर से संता को रोक न सका।
जब वे आगे बढ़े तो उन्हें एक सुंदर सा बगीचा दिखाई दिया। वहाँ सोने की घास उगी हुई थी। संता ने सोचा, "अगर इसमें से किलो-दो किलो घास भी इकट्ठी कर लूँ तो कई हफ़्ते तक चैन से स्वर्ग में रंडियाँ चोद सकता हूँ", सो उसने यमदूत से कहा, "मुझे दो-तीन किलो घास चाहिए, क्योंकि बाद में मुझे इसकी ज़रूरत पड़ेगी"। यमदूत उसे रोकता रहा, लेकिन संता नहीं माना, और बेदर्दी से सोने की घास को उखाड़-उखाड़कर अपनी जेबों में भरने लगा।
अचानक.............संता को एक ज़ोर का थप्पड़ पड़ा
उसने देखा की उसकी नींद टूट गई है, और प्रीतो उसे ग़ुस्से से घूर रही है । प्रीतो गुस्से से बोली: "मादरचोद, बहन के लौड़े, एक रात में दो बार मेरी चूत मार चुके हो, एक बार गाँड़ मार चुके हो, अब जो चूत पर बचे-खुचे बाल हैं उन्हें क्यों उखाड़ रहे हो ?"






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